Thursday, June 23, 2011

कब समझेगा .....


दर्दे मुफलिसी वो जाने  कब समझेगा ,
जब लुट जाएगा सब क्या तब समझेगा

कौन हुआ है किसका उम्र भर यहाँ पर ,
कड़वी सच्चाई ये दिल कब समझेगा

जज़्बात यहाँ सिर्फ दौलतमंदों के लिए हैं ,
बच्चा गरीब का ये कब समझेगा

बीता बचपन जो भूख के आँचल मे ,
चौड़ी सड़को का मतलब वो कब समझेगा

वतन के मसीहाओं को क्या लेना देना ,
दगाबाज़ी इनकी वो कब समझेगा

दिमागदारों की सोहबत में मशगूल है जो ,
दिलवालों की ज़रूरत वो कब समझेगा


नरेश 'मधुकर'


copyright 2011

1 comment:

  1. भई वाह, बहुत अच्छी रचना है

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