Sunday, October 9, 2011

इंसानियत पे हावी इंसान ना हो ....

आवारगी का मेरी ये अंजाम ना हो
फासला हो बहुत  कोई मुकाम ना हो

तेरा हर फ़ैसला है मुझको कबूल मौला
बेवफ़ाई का मुझ पे इल्ज़ाम ना हो ...

वो बुलंदी भी भला किस काम की है
पहुँच कर जहाँ पर मेरा ईमान ना हो...

मुफलिसों को खुदा वो ज़िंदगी बख़्शे
जहाँ बाकी कोई अरमान ना हो ....

मुल्क की तकदीर कुछ यूँ लिख मौला
कभी इंसानियत पे हावी इंसान ना हो ....

नरेश'मधुकर'

















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