Thursday, July 21, 2011

मुझ पे करना यकीन

मुझ पे करना यकीन मुझ पे करना यकीन
मुझ पे करना यकीन मुझ पे करना यकीन


दर्द हद से बड़े और दवा ना मिले ,
खोते जाएँ परिंदों के भी हौसले ......
ऐसा वक़्त कहीं ज़िन्दगी पे कभी
आ जाए तो मुझ पे करना यकीन


मुझ पे करना यकीन मुझ पे करना यकीन
मुझ पे करना यकीन मुझ पे करना यकीन



टूटना ही लिखा है अगर ख्वाब का
टूट जाये अभी जब ये मुकम्मिल नहीं...
फिर किसी मोड़ पे ग़र हम तुम मिले
तो यूँ लगे की कुछ मुश्किल नहीं ...


मुझ पे करना यकीन मुझ पे करना यकीन
मुझ पे करना यकीन मुझ पे करना यकीन



कैसे जाने की तुझको इजाज़त मैं दूँ
मेरा तेरे सिवा अब कोई भी नहीं ....
दिल के टूटने का मैं अब क्या ग़म करूँ
की ये किस्सा पुराना है नया कुछ नहीं.......


मुझ पे करना यकीन मुझ पे करना यकीन
मुझ पे करना यकीन मुझ पे करना यकीन


नरेश 'मधुकर'

copyright 2011

कभी आसमां होते थे ...


वो ज़मीन हम आसमां होते थे
तब कही दोनों जहाँ होते थे
हो न पाया वो कभी दूर मुझसे
 
फासले चाहे दरमियाँ होते थे

तन्हा खड़े खुद का पता पूछते हैं
 
जिनके पीछे कभी कारवाँ होते थे
ताने सीना खड़ी है इमारत जहां  

मुफलिसों के कभी छोटे मकाँ होते थे

स्याही से पुत गयी है बूढी दीवारें
 
जिन पे कभी उल्फत के निशाँ होते थे
खताएं अपनी  महसूस करता हूँ  
खो कर उन्हें जो हमनवां होते थे

फकीरी में मज़ा आ रहा है उनको
 
जिनके कदमो में कभी आसमां होते थे 
गुज़रे पास से बिन मिलाये नज़र 
जो कभी मेरे रहनुमां होते थे

नरेश 'मधुकर'

copyright 2011

कोई बात नहीं है ....


बातों में अब वो बात नहीं है
दिल की दिल से मुलाकात 'नहीं है

इतना तो बता दे ऐ रूठने वाले ,

क्या मनाने जैसे भी हालात नहीं है

रहेगा क़यामत तक ये सब्र कायम 

मेरे इंतज़ार से लम्बी ये रात नहीं है

परिंदों से पूछो तो जान जाओ शायद 

मस्त हवाओं की कोई ज़ात नहीं है

खामोशी का मतलब ये तो नहीं हैं 

सन्नाटों के कोई जज़्बात नहीं है
 
न दे पाओगे मधुकर इन नज़रों को धोखा  
नम आँखों से कहते हो,कोई बात नहीं है ...

नरेश मधुकर 
copyright 2011

Thursday, July 14, 2011

इतनी अच्छी किस्मत मेरी तो नहीं है ...

चाहता है वो  इज़हार ऐ मोहब्बत ,
कह दूँ  उसे मेरी  ,हिम्मत नहीं है

लगता है अच्छा यूँ साथ साथ चलना ,

कैसे मानू ये राह ऐ उल्फत नहीं है

दोस्ती का रिश्ता ही रह जाये कायम ,

खो दूँ  उसे  ऐसी चाहत नहीं है

पा लूँ इस दुनिया से सब कुछ
 'मधुकर'
इतनीअच्छी किस्मत मेरी तो नहीं है ...


नरेश "मधुकर"

क्या लिखूं ...


क्या लिखूं अपनी कलम से यह कहानी ,
बेहतर हैं सुन लेना कल जग  की जुबानी 

कहती है मुझको ये दुनिया दीवाना 
और मैं कहता हूँ  ये दुनिया दीवानी 

कौन किसका हो सका उम्रभर यहाँ पे ,
प्यार, वफ़ा, दोस्ती, सब बाते बेमानी 

साथ चलना ,प्यार करना और बिछड़ना 
हर मोहब्बत की  बस वही कहानी

बंजर  ज़मीं अब तक  न भूल पायी है 
गुज़रे मौसम कि वो  बेसुध जवानी  ...


नरेश 'मधुकर'
copyright 2011

इबादत की है ,


करके तेरा रुख  इबादत की है ,
मैंने सिर्फ तुमसे मोहब्बत की है


तेरे कहर को भी हमने माना काबा , 
ऐसी शिद्दत से तिलावत की है

किया जिसने मेरे ऐतबार का खून 
उस कातिल की मैंने हिफाज़त की है

छोड़ आये सब कुछ जिसके भरोसे 
उसी ने अमानत में खयानत की है 

ग़म नहीं इस दुनिया का मधुकर मुझको  
मोड़ कर मुंह तुमने क़यामत की है ...
 
नरेश 'मधुकर'

Tuesday, July 12, 2011

धुंआ मिलता है



हर पीर नहीं मिलवाता खुदा से
खुद से मिलने पे ही खुदा मिलता है

दुनिया एक दोराहा है यहाँ पर ,
खुद के ढूंढें ही पता मिलता है

चलते है साथ साथ सभी लेकिन ,
हर शक्स को मुकाम जुदा मिलता है

ये तो अपना अपना नसीब है 'मधुकर'
किसी को मंजिल तो किसी को धुंआ मिलता है 

नरेश 'मधुकर'
copyright 2011

Monday, July 11, 2011

कौन है कैसा है खुदा क्या मालूम

कौन है कैसा है खुदा क्या मालूम
मुझ सा या तुम सा है भला क्या मालूम 

 

कर सकता है अगर मुफलिस का भला
तो बुत बना सोचता हैं क्या क्या मालूम 

 

अपने खून से लड़ते इस इंसान को देखो
जाने खुद को समझता है क्या ? क्या मालूम

अंजामे वफ़ा तो हम ने देख लिया 'मधुकर',
बाकि अब देखना है क्या ? क्या मालूम  

मुझको तो हर शै हर ओर नजर आता है  

क्यूँ तुमको नहीं दिखता भला ? क्या मालूम 

Sunday, July 3, 2011

छीनेगा जो हक़ अवाम का दोज़ख़ मे जाएगा


झूठ को गर न जलाया जाएगा 
सच सलीबों पे चड़ाया जाएगा

बात इस कदर मेरे बच्चों को 
मेरे बाद कौन समझाएगा  

आज आवाज़ बुलंद है कल हो ना हो
बेज़ुबानों का दर्द कब तक बोल पाएगा  

मुल्क के मसीहाओं को कौन समझाए 
खुदा इन मुफलिसों के साथ नज़र आएगा 

भूख से बिलखते बच्चों से जो पूछते हैं
बोल बेटा सुल्तान किस को बनाएगा 

जितना जल्दी समझ ले ये तो बेहतर है 
छीनेगा जो हक़ अवाम का दोज़ख़ मे जाएगा 
नरेश'मधुकर'