पूछा किसी ने मधुकर गुनाह किए किसके
लिए
आया जवाब की हुज़ूर कमबख्त
दिल के लिए
ज़माने भर का बैर मोल ले लिया
तुम ने प्यारे
क्या इसी कमजर्फ कातिल के लिए
बड़ा मायूस दिखा समंदर ये मंज़र
देख कर
कैसे जाती है लहरें उसे छोड़कर
साहिल के लिए
तब याद आई लोगों को की कोई शमां भी
थी
छू सकी न कयामत भी जिसे अब तक मधुकर
उस से चंद अपनों ने बदले मिल के लिए ...
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