इस सवाल पर की कौन किस से बेहतर हैं
वादियों के चश्मे अब तक खून
से तर हैं
बनाया था तुझे मैंने एक मिटटी से इंसा
मजहबों में तकसीम तू यहाँ
आ कर है
रौंद दो
हमें तुम्हारे सियासती बूटों के तले
हम फकीरों
के पास कौन से लश्कर है
है इल्म-ऐ-अमन पंछियों से सीखने लायक
जो उड़े दिन भर और इकट्ठे शाख पर हैं
पीए रंज सारा और फिर भी मुस्करा के मिले

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