पूछे हवाएं और ये डगर पूछे
मेरे कातिल मुझी से मेरा घर पूछे
बड़ा मशगूल है हर शख्स यहाँ पर
दीवानों कि यहाँ कौन खबर पूछे
क्या पूछते हो मुस्कराहट का सबब
कोई मुझ पे बीता वो कहर पूछे
क्यूँ चल दिए मुझे छोड़ कर तुम
मुझ से मेरा तन्हा सफर पूछे
क्या कीमत हैं तेरे जज्बातों की ?
आज मुझ से ये ज़ालिम शहर पूछे ...
नरेश मधुकर copyright 2012

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