बड़ा मायूस शहर ,कुछ दूर तुम भी साथ चलो
थक चुका हूँ अय ज़िन्दगी तेरा साथ देकर
कब आये आखरी पहर कुछ दूर तुम भी साथ चलो
इस वीरान भीड़ के बीच मैं बड़ा तनहा हूँ
खो गया हमसफ़र कुछ दूर तुम भी साथ चलो
फेर कर मुँह जब खड़ी थी ज़िन्दगी मेरी तरफ
तभी तुम आये नज़र कुछ दूर तुम भी साथ चलो
नहीं मरता कोई दो बार प्यार करने से
आओ आजमाए धीमा ज़हर ,कुछ दूर तुम भी साथ चलो
नरेश मधुकर ©


























